कुरान - 14:27 सूरह इब्राहीम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

27
يُثَبِّتُ ٱللَّهُ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ بِٱلۡقَوۡلِ ٱلثَّابِتِ فِي ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا وَفِي ٱلۡأٓخِرَةِۖ وَيُضِلُّ ٱللَّهُ ٱلظَّـٰلِمِينَۚ وَيَفۡعَلُ ٱللَّهُ مَا يَشَآءُ

Transliteration: (Yusabbitul laahul lazeena aamanoo bilqawlis saabiti fil hayaatid dunyaa wa fil Aakhirati wa yudillul laahuz zaalimeen; wa yaf'alul laahu maa yashaaa')

अल्लाह ईमान वालों को उस सुदृढ़ वचन (कलिमा-ए-तौहीद) के द्वारा सांसारिक जीवन में और आख़िरत (क़ब्र व हश्र) में भी दृढ़ता (अडिगता) प्रदान करता है; और अल्लाह ज़ालिमों को भटका देता है, और अल्लाह जो चाहता है करता है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह इब्राहीम आयत 27 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह इब्राहीम – आयत 27 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] क़ौल-ए-साबित और क़ब्र का इम्तिहान

हदीस-ए-पाक में आता है कि इस आयत का विशेष संबंध क़ब्र के सवालों (मुनकर-नकीर के इम्तिहान) से है। जो दुनिया में 'ला इलाहा इल्लल्लाह' पर सच्चे दिल से क़ायम रहा, अल्लाह मौत के वक़्त और क़ब्र में भी उसे दृढ़ता अता फ़रमाता है और वह सही जवाब देता है।

✅ [2] ज़ालिमों की बदहवासी

इसके विपरीत हठधर्मी और मुनाफ़िक़ क़ब्र और हश्र में घबराकर कहेंगे: 'हाय अफ़सोस! हमें कुछ मालूम नहीं।'

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