कुरान - 14:28 सूरह इब्राहीम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

28
۞أَلَمۡ تَرَ إِلَى ٱلَّذِينَ بَدَّلُواْ نِعۡمَتَ ٱللَّهِ كُفۡرٗا وَأَحَلُّواْ قَوۡمَهُمۡ دَارَ ٱلۡبَوَارِ

Transliteration: (Alam tara ilal lazeena baddaloo ni'matal laahi kufranw wa ahalloo qawmahum daaral bawaar)

क्या तुमने उन लोगों को नहीं देखा जिन्होंने अल्लाह की नेमत के बदले कृतघ्नता (नाशुक्री/कुफ़्र) अपनाई और अपनी क़ौम को विनाश के घर में उतार दिया— (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह इब्राहीम आयत 28 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह इब्राहीम – आयत 28 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] नेमत के बदले नाशुक्री और क़ुरैश के सरदार

अल्लाह ने अहले-मक्का पर सबसे बड़ी नेमत यह की थी कि उनके बीच अपने सर्वश्रेष्ठ रसूल हज़रत मुहम्मद ﷺ को भेजा और हरम-ए-काबा का अमन दिया। मगर अबू जहल और कुरैश के सरदारों ने इस नेमत की क़द्र करने के बजाय कुफ़्र अपनाया और अपनी क़ौम को बद्र के कुएं और हलाकत में झोंक दिया।

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