कुरान - 31:26 सूरह लुक़मान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

26
لِلَّهِ مَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۚ إِنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلۡغَنِيُّ ٱلۡحَمِيدُ

Transliteration: (Lillahi ma fis samaa waati wal ard; innal laaha Huwal Ghaniyyul Hameed)

अल्लाह ही का है जो कुछ आसमानों और ज़मीन में है; बेशक अल्लाह ही बे-नियाज़, हर तारीफ़ के लायक़ है [59]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह लुक़मान आयत 26 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह लुक़मान तफ़सीर - आयत 26

"अल्लाह ही का है जो कुछ आसमानों और ज़मीन में है; बेशक अल्लाह ही बे-नियाज़, हर तारीफ़ के लायक़ है [59]।"

[59] हक़ीक़ी मल्कियत और हम्द सिर्फ़ अल्लाह के लिए

इस आयत के मुतलक़ मफ़हूम से यह वाज़ेह होता है कि अल्लाह के सिवा कोई भी ज़ाती तौर पर बे-नियाज़ या मुतलक़ हम्द का हक़दार नहीं है। दूसरों को जो भी मल्कियत या बे-नियाज़ी हासिल होती है वह आरज़ी और अल्लाह की अता पर मौक़ूफ़ है।

अगर किसी के पास दौलत है, तो वह अल्लाह की अता से है। अगर किसी की तारीफ़ होती है, तो वह अल्लाह के दिए हुए फ़ज़्ल की वजह से है। जैसा कि अल्लाह ने फ़रमाया: “यह कि उन्हें अल्लाह और उसके रसूल ने अपने फ़ज़्ल से ग़नी कर दिया” (सूरह अत-तौबा, 9:74)।

पस, दौलत और इज़्ज़त उसकी नेअमतों का अक्स हैं, और हक़ीक़ी तौर पर ग़नी और हमीद की ज़ात सिर्फ़ और सिर्फ़ अल्लाह की ज़ात है।

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