कुरान - 31:28 सूरह लुक़मान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

28
مَّا خَلۡقُكُمۡ وَلَا بَعۡثُكُمۡ إِلَّا كَنَفۡسٖ وَٰحِدَةٍۚ إِنَّ ٱللَّهَ سَمِيعُۢ بَصِيرٌ

Transliteration: (Maa khalqukum wa laa ba'sukum illaa kanafsinw-waa hidah; innal laaha Samee'um Baseer)

तुम सब का पैदा करना और तुम सब का (मरने के बाद) दोबारा ज़िंदा करना बस ऐसा ही है जैसे एक जान का (पैदा करना व जिलाना) [62]; बेशक अल्लाह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ देखने वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह लुक़मान आयत 28 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह लुक़मान तफ़सीर - आयत 28

"तुम सब का पैदा करना और तुम सब का (मरने के बाद) दोबारा ज़िंदा करना बस ऐसा ही है जैसे एक जान का (पैदा करना व जिलाना) [62]; बेशक अल्लाह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ देखने वाला है।"

[62] तमाम मख़लूक़ात पर अल्लाह की कामिल क़ुदरत

यह आयत बयान फ़रमाती है कि तमाम इंसानों को पैदा करना और क़यामत के दिन सबको दोबारा ज़िंदा करना अल्लाह के लिए इतना ही आसान है जितना किसी एक जान को पैदा करना और जिलाना।

दूसरे अलफ़ाज़ में, मख़लूक़ की तादाद, जसामत या पेचीदगी अल्लाह के लिए कोई रुकावट या मशक़्क़त नहीं बनती। चाहे एक इंसान हो या अरबों-खरबों, अल्लाह की क़ुदरत यकसाँ, मुकम्मल और बे-मेहनत कारफ़रमा है।

यह उसके मुतलक़ इख़्तियार को साबित करता है, जो इंसानी कमज़ोरियों से पाक है। जिस तरह उसने बग़ैर किसी मदद के सबको पैदा किया, उसी तरह वह एक हुक्म से सबको दोबारा ज़िंदा फ़रमाएगा, बग़ैर किसी थकान या उलझन के।

आयत का इख़्तिताम इस बात पर होता है कि अल्लाह समीअ (सब कुछ सुनने वाला) और बसीर (सब कुछ देखने वाला) है, यानी उसकी मख़लूक़ का कोई भी अमल या कैफ़ियत उसके इल्म से ओझल नहीं—चाहे ज़िंदगी में हो, मौत में हो, या क़यामत के मैदान में।

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