कुरान - 19:10 सूरह मरयम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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قَالَ رَبِّ ٱجۡعَل لِّيٓ ءَايَةٗۖ قَالَ ءَايَتُكَ أَلَّا تُكَلِّمَ ٱلنَّاسَ ثَلَٰثَ لَيَالٖ سَوِيّٗا

Transliteration: (Qaala Rabbij 'al leee Aayah; qaala Aayatuka allaa tukalliman naasa salaasa layaalin sawiyyaa)

उन्होंने अर्ज़ किया, 'ऐ मेरे रब! मेरे लिए कोई निशानी मुक़र्रर फ़रमा दे।' फ़रमाया, 'आपकी निशानी यह है कि आप तंदुरुस्त होते हुए भी तीन रातें (दिन-रात) लोगों से बात न कर सकेंगे।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मरयम आयत 10 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह मरयम - आयत 10

✅ हमल की निशानी: ज़बान का रुकना

हज़रत ज़करिय्या ने बशारत के वक़्त की पहचान के लिए निशानी चाही। अल्लाह ने निशानी दी कि आप बिल्कुल सेहतमंद होंगे मगर तीन दिन तक लोगों से बात नहीं कर सकेंगे, सिर्फ़ ज़िक्रे इलाही और तस्बीह के लिए ज़बान चलेगी।

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