कुरान - 19:11 सूरह मरयम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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فَخَرَجَ عَلَىٰ قَوۡمِهِۦ مِنَ ٱلۡمِحۡرَابِ فَأَوۡحَىٰٓ إِلَيۡهِمۡ أَن سَبِّحُواْ بُكۡرَةٗ وَعَشِيّٗا

Transliteration: (Fakharaja 'alaa qawmihee minal mihraabi fa-awhaaa ilaihim an sabbihoo bukratanw wa 'ashiyyaa)

फिर वे मेहराब (इबादतगाह) से निकलकर अपनी क़ौम के सामने आए, तो उन्होंने इशारे से उन्हें समझाया कि 'सुबह व शाम अल्लाह की तस्बीह (पाकी) बयान करो।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मरयम आयत 11 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह मरयम - आयत 11

✅ इशारे से तस्बीह का हुक्म

जब ज़बान रुक गई तो हज़रत ज़करिय्या ने समझ लिया कि नेमत हासिल हो चुकी है। उन्होंने अपनी क़ौम को इशारे से ताकीद की कि इस अज़ीम नेमत पर सुबह व शाम अल्लाह की हम्द व तस्बीह करो।

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