कुरान - 19:15 सूरह मरयम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

15
وَسَلَٰمٌ عَلَيۡهِ يَوۡمَ وُلِدَ وَيَوۡمَ يَمُوتُ وَيَوۡمَ يُبۡعَثُ حَيّٗا

Transliteration: (Wa salaamun 'alaihi yawma wulida wa yawma yamootu wa yawma yub'asu haiyyaa (section 1))

और उन पर सलामती हो जिस दिन वे पैदा हुए, और जिस दिन उनकी वफ़ात होगी, और जिस दिन वे दोबारा ज़िन्दा करके उठाए जाएंगे! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मरयम आयत 15 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह मरयम - आयत 15

✅ ज़िन्दगी के तीनों नाज़ुक पड़ावों पर इलाही सलामती

इंसान की ज़िन्दगी में तीन सबसे नाज़ुक और दहशत भरे मरहले होते हैं: दुनिया में पैदाइश का दिन, मौत का दिन, और क़ियामत के रोज़ दोबारा उठाए जाने का दिन। अल्लाह ने हज़रत यह्या को इन तीनों मरहलों पर अपनी सलामती और अमान की बशारत दी।

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