कुरान - 19:42 सूरह मरयम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

42
إِذۡ قَالَ لِأَبِيهِ يَـٰٓأَبَتِ لِمَ تَعۡبُدُ مَا لَا يَسۡمَعُ وَلَا يُبۡصِرُ وَلَا يُغۡنِي عَنكَ شَيۡـٔٗا

Transliteration: (Iz qaala li abeehi yaaa abati lima ta'budu maa laa yasma'u wa laa yubsiru wa laa yughnee 'anka shai'aa)

जब उन्होंने अपने (मुशरिक) बाप से कहा, 'ऐ मेरे अब्बा जान! आप ऐसी चीज़ की पूजा क्यों करते हैं जो न सुनती है, न देखती है, और न आपके कुछ काम आ सकती है?' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मरयम आयत 42 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह मरयम - आयत 42

✅ बुतपरस्ती की बेबुनियादी पर माकूल सवाल

हज़रत इब्राहीम ने अपने बाप (आज़र) को इन्तेहाई मुहब्बत और अदब से समझाया कि ऐ अब्बा जान! पत्थर और लकड़ी के बेजान बुतों को क्यों पूजते हैं जो न किसी की फ़रियाद सुन सकते हैं, न देख सकते हैं और न किसी नफ़ा या नुक़्सान का इख़्तियार रखते हैं?

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