कुरान - 19:44 सूरह मरयम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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يَـٰٓأَبَتِ لَا تَعۡبُدِ ٱلشَّيۡطَٰنَۖ إِنَّ ٱلشَّيۡطَٰنَ كَانَ لِلرَّحۡمَٰنِ عَصِيّٗا

Transliteration: (Yaaa abati laa ta'budish Shaitaan; innash Shaitaana kaana lir Rahmaani 'asiyyaa)

'ऐ मेरे अब्बा जान! शैतान की इबादत न कीजिए; बेशक शैतान रहमान (निहायत मेहरबान रब) का बड़ा ही नाफ़रमान है।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मरयम आयत 44 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह मरयम - आयत 44

✅ शैतान की ताअत से बचने की नसीहत

बुतों की पूजा दरअसल शैतान की पैरवी और इबादत है। शैतान अल्लाह का अज़ली दुश्मन और नाफ़रमान है, जो इंसान को भी अपने साथ जहन्नम का ईंधन बनाना चाहता है।

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