कुरान - 19:45 सूरह मरयम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

45
يَـٰٓأَبَتِ إِنِّيٓ أَخَافُ أَن يَمَسَّكَ عَذَابٞ مِّنَ ٱلرَّحۡمَٰنِ فَتَكُونَ لِلشَّيۡطَٰنِ وَلِيّٗا

Transliteration: (Yaaa abati innee akhaafu ai yamassaka 'azaabum minar Rahmaani fatakoona lish Shaitaani waliyyaa)

'ऐ मेरे अब्बा जान! मुझे डर है कि कहीं रहमान की तरफ़ से आपको कोई अज़ाब न छू ले, फिर आप शैतान के साथी बन जाएं।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मरयम आयत 45 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह मरयम - आयत 45

✅ बाप के लिए शफ़क़त और अज़ाबे इलाही का डर

हज़रत इब्राहीम का दिल अपने बाप के लिए तड़प रहा था। उन्होंने शफ़क़त से फ़रमाया कि अगर आप शिर्क पर अड़े रहे, तो अल्लाह की रहमत से महरूम होकर अज़ाब के शिकार हो जाएंगे और दोज़ख़ में शैतान के हमनशीन बनेंगे।

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