कुरान - 19:43 सूरह मरयम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

43
يَـٰٓأَبَتِ إِنِّي قَدۡ جَآءَنِي مِنَ ٱلۡعِلۡمِ مَا لَمۡ يَأۡتِكَ فَٱتَّبِعۡنِيٓ أَهۡدِكَ صِرَٰطٗا سَوِيّٗا

Transliteration: (Yaaa abati innee qad jaaa'anee minal 'ilmi maa lam ya'tika fattabi'neee ahdika siraatan Sawiyyaa)

'ऐ मेरे अब्बा जान! बेशक मेरे पास ऐसा इल्म आया है जो आपके पास नहीं आया; पस आप मेरी पैरवी कीजिए, मैं आपको सीधी राह की रहनुमाई करूँगा।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मरयम आयत 43 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह मरयम - आयत 43

✅ इल्मे वह्य और सीधी राह की दावत

हज़रत इब्राहीम ने बाप के मर्तबे का लिहाज़ रखते हुए तकब्बुर के बग़ैर फ़रमाया कि अल्लाह ने मुझे वह्य और हिदायत का वह इल्म बख़्शा है जिससे आप महरूम हैं। आप मेरी बात मान लीजिए, मैं आपको दुनिया व आख़िरत की सलामती की राह पर ले चलूँगा।

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