कुरान - 19:54 सूरह मरयम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

54
وَٱذۡكُرۡ فِي ٱلۡكِتَٰبِ إِسۡمَٰعِيلَۚ إِنَّهُۥ كَانَ صَادِقَ ٱلۡوَعۡدِ وَكَانَ رَسُولٗا نَّبِيّٗا

Transliteration: (Wazkur fil Kitaabi ismaa'eel; innahoo kaana saadiqal wa'di wa kaana Rasoolan Nabiyyaa)

और किताब में इस्माईल का तज़्किरा कीजिए; बेशक वे वादे के सच्चे थे, और वे रसूल और नबी थे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मरयम आयत 54 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह मरयम - आयत 54

✅ हज़रत इस्माईल (अलैहिस्सलाम): वादे के सच्चे (सादिक़ुल वाअद)

हज़रत इस्माईल (अलैहिस्सलाम) की ख़ास सिफ़त 'सादिक़ुल वाअद' (वादे का पक्का होना) थी। उन्होंने अपने बाप से क़ुर्बानी के वक़्त सब्र का वादा पूरा कर दिखाया और हर अहद को वफ़ा फ़रमाया।

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