कुरान - 19:58 सूरह मरयम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

58
أُوْلَـٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ أَنۡعَمَ ٱللَّهُ عَلَيۡهِم مِّنَ ٱلنَّبِيِّـۧنَ مِن ذُرِّيَّةِ ءَادَمَ وَمِمَّنۡ حَمَلۡنَا مَعَ نُوحٖ وَمِن ذُرِّيَّةِ إِبۡرَٰهِيمَ وَإِسۡرَـٰٓءِيلَ وَمِمَّنۡ هَدَيۡنَا وَٱجۡتَبَيۡنَآۚ إِذَا تُتۡلَىٰ عَلَيۡهِمۡ ءَايَٰتُ ٱلرَّحۡمَٰنِ خَرُّواْۤ سُجَّدٗاۤ وَبُكِيّٗا۩ا

Transliteration: (Ulaaa'ikal lazeena an'amal laahu 'alaihim minan Nabiyyeena min zurriyyati Aadama wa mimman hamalnaa ma'a Noohinw wa min zurriyyati Ibraaheema wa Israaa'eela wa mimman hadainaa wajta bainaaa; izaa tutlaa 'alaihim Aayaatur Rahmaani kharroo sujjadanw wa bukiyyaa (make sajda))

ये वे लोग हैं जिन पर अल्लाह ने इनाम फ़रमाया—आदम की औलाद में से अंबिया में से, और उन लोगों (की नस्ल) में से जिन्हें हमने नूह के साथ (कश्ती में) सवार किया था, और इब्राहीम और इस्राईल (याक़ूब) की औलाद में से, और उन लोगों में से जिन्हें हमने हिदायत दी और चुन लिया; जब उनके सामने रहमान की आयतें पढ़ी जाती थीं, तो वे रोते हुए सजदे में गिर पड़ते थे। ۩ (सजदा) (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मरयम आयत 58 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह मरयम - आयत 58

✅ मुक़द्दस अंबिया की आजिज़ाना सजदारिज़ाई (सजदा-ए-तिलावत)

यह आयत तमाम जलीलुल क़द्र अंबिया और उनके सालेह पैरोकारों की अज़मत का खुलासा है। जब भी उनके सामने अल्लाह का कलाम पढ़ा जाता था, तो वे दिल की रक़्क़त और आजिज़ी से रोते हुए सजदे में गिर पड़ते थे। इस मुबारक आयत पर सजदा-ए-तिलावत वाजिब/सुन्नत है।

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