कुरान - 19:59 सूरह मरयम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

59
۞فَخَلَفَ مِنۢ بَعۡدِهِمۡ خَلۡفٌ أَضَاعُواْ ٱلصَّلَوٰةَ وَٱتَّبَعُواْ ٱلشَّهَوَٰتِۖ فَسَوۡفَ يَلۡقَوۡنَ غَيًّا

Transliteration: (Fakhalafa min ba'dihim khalfun adaa'us Salaata wattaba'ush shahawaati fasawfa yalqawna ghaiyyaa)

फिर उनके बाद ऐसे नाख़लफ़ (नाकारा) लोग जानशीन बने जिन्होंने नमाज़ को ज़ाया कर दिया और नफ़्सानी ख़्वाहिशात की पैरवी करने लगे; पस वे जल्द ही 'ग़य्या' (जहन्नम की खौफ़नाक वादी) में जा गिरेंगे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मरयम आयत 59 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह मरयम - आयत 59

✅ नमाज़ ज़ाया करने और ख़्वाहिशात के पैरोकारों का अंजाम

अंबिया के बाद ऐसे नाअहल लोग आए जिन्होंने नमाज़ों को छोड़ दिया या उनके औक़ात को बर्बाद किया और दुनियावी ऐश व नफ़्सपरस्ती में डूब गए। उनका ठिकाना जहन्नम की 'ग़य्या' नामी वादी होगी जो इन्तेहाई गहरी, बदबूदार और खौफ़नाक अज़ाब की जगह है।

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