कुरान - 19:61 सूरह मरयम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

61
جَنَّـٰتِ عَدۡنٍ ٱلَّتِي وَعَدَ ٱلرَّحۡمَٰنُ عِبَادَهُۥ بِٱلۡغَيۡبِۚ إِنَّهُۥ كَانَ وَعۡدُهُۥ مَأۡتِيّٗا

Transliteration: (Jannaati 'adninil latee wa'adar Rahmaanu ibaadahoo bilghaib; innahoo kaana wa'duhoo ma'tiyyaa)

हमेशा रहने वाले बाग़ात (जन्नाते अद्न), जिनका रहमान ने अपने बन्दों से ग़ैब में वादा फ़रमाया है; बेशक उसका वादा सामने आकर ही रहने वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मरयम आयत 61 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह मरयम - आयत 61

✅ जन्नाते अद्न और अल्लाह का सच्चा वादा

जन्नत की नेमतें ऐसी हैं जिन्हें दुनिया में आंखों ने देखा नहीं, मगर अहले ईमान ने बग़ैर देखे उस पर ईमान रखा। अल्लाह का यह वादा अटल और यक़ीनी है जो क़ियामत के दिन हर मोमिन को हासिल होगा।

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