कुरान - 19:62 सूरह मरयम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

62
لَّا يَسۡمَعُونَ فِيهَا لَغۡوًا إِلَّا سَلَٰمٗاۖ وَلَهُمۡ رِزۡقُهُمۡ فِيهَا بُكۡرَةٗ وَعَشِيّٗا

Transliteration: (Laa yasma'oona feehaa laghwan illaa salaamaa; wa lahum rizquhum feehaa bukratanw wa 'ashiyyaa)

वे वहाँ कोई बेहूदा (लह्व) बात नहीं सुनेंगे, सिवाय 'सलाम' के; और उनके लिए वहाँ सुबह व शाम उनकी रोज़ी मौजूद होगी। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मरयम आयत 62 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह मरयम - आयत 62

✅ जन्नत का पाकीज़ा माहौल और बा-क़ायदा रिज़्क़

जन्नत में न कोई गाली होगी, न झूठ, न ग़ीबत और न कोई बेहूदा बात। वहाँ सिर्फ़ सलामती, रहमत और फ़रिश्तों व अहले जन्नत का आपस में 'सलाम' होगा। वहाँ हर वक़्त आला तरीन नेमतें और रिज़्क़ फ़राहम रहेगा।

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