कुरान - 19:64 सूरह मरयम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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وَمَا نَتَنَزَّلُ إِلَّا بِأَمۡرِ رَبِّكَۖ لَهُۥ مَا بَيۡنَ أَيۡدِينَا وَمَا خَلۡفَنَا وَمَا بَيۡنَ ذَٰلِكَۚ وَمَا كَانَ رَبُّكَ نَسِيّٗا

Transliteration: (Wa maa natanazzalu illaa bi amri Rabbika lahoo maa baina aideenaa wa maa khalfanaa wa maa baina zaalik; wa maa kaana Rabbuka nasiyyaa)

(जिब्रील ने कहा) 'और हम (फ़रिश्ते) आपके रब के हुक्म के बग़ैर नहीं उतरते; जो कुछ हमारे आगे है और जो कुछ हमारे पीछे है और जो कुछ इसके दरमियान है सब उसी का है; और आपका रब कभी भूलने वाला नहीं है।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मरयम आयत 64 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह मरयम - आयत 64

✅ फ़रिश्तों की आमद रब के हुक्म से और अल्लाह की ग़ैर-ग़फ़लत

जब कुछ अरसे के लिए वह्य रुक गई थी और रसूलुल्लाह (ﷺ) हज़रत जिब्रील की ज़ियारत के मुश्ताक़ थे, तो हज़रत जिब्रील ने वह्य नाज़िल होने पर अर्ज़ किया कि हम फ़रिश्ते अपनी मर्ज़ी से नहीं बल्कि अल्लाह के हुक्म से ही उतरते हैं। आगे, पीछे और बीच की हर चीज़ का मालिक वही है, और आपका रब कभी किसी चीज़ को भूलता नहीं है।

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