कुरान - 19:65 सूरह मरयम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

65
رَّبُّ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ وَمَا بَيۡنَهُمَا فَٱعۡبُدۡهُ وَٱصۡطَبِرۡ لِعِبَٰدَتِهِۦۚ هَلۡ تَعۡلَمُ لَهُۥ سَمِيّٗا

Transliteration: (Rabbus samaawaati wal ardi wa maa bainahumaa fa'bud hu wastabir li'ibaadatih; hal ta'lamu lahoo samiyyaa (section 4))

'वह आसमानों और ज़मीन का और जो कुछ उनके दरमियान है सबका रब है; पस उसी की इबादत कीजिए और उसकी इबादत पर जमे रहिए; क्या आप उसके नाम का कोई हमसर (बराबर का) जानते हैं?' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मरयम आयत 65 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह मरयम - आयत 65

✅ कायनात का रब, इबादत पर साबितक़दमी और बेमिसाल ज़ात

ज़मीन व आसमान की हर चीज़ का ख़ालिक़ व मालिक सिर्फ़ अल्लाह है। इसलिए तमाम इंसानों का फ़र्ज़ है कि सिर्फ़ उसी की इबादत करें और इबादत की मुश्क़िलों पर सब्र व इस्तिक़ामत इख़्तियार करें। कायनात में कोई ज़ात ऐसी नहीं जो अल्लाह की सिफ़ात, नामों और शान में उसके बराबर या हमसर हो सके।

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