कुरान - 19:67 सूरह मरयम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

67
أَوَلَا يَذۡكُرُ ٱلۡإِنسَٰنُ أَنَّا خَلَقۡنَٰهُ مِن قَبۡلُ وَلَمۡ يَكُ شَيۡـٔٗا

Transliteration: ('A wa laa yazkurul insaanu annaa khalaqnaahu min qablu wa lam yaku shai'aa)

क्या इंसान याद नहीं करता कि हमने इससे पहले उसे पैदा किया था जबकि वह कुछ भी न था? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मरयम आयत 67 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह मरयम - आयत 67

✅ पहली पैदाइश दोबारा ज़िन्दा करने की खुली दलील

अल्लाह तआला इंसान को उसकी असल याद दिलाता है कि जब तू कुछ भी न था, तेरा कोई वजूद न था, तब अल्लाह ने तुझे अदम से वजूद बख़्शा। तो जिसने पहली बार पैदा किया, उसके लिए दोबारा पैदा करना क्या मुश्किल हो सकता है!

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