कुरान - 19:66 सूरह मरयम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

66
وَيَقُولُ ٱلۡإِنسَٰنُ أَءِذَا مَا مِتُّ لَسَوۡفَ أُخۡرَجُ حَيًّا

Transliteration: (Wa yaqoolul insaanu 'a izaa maa mittu lasawfa ukhraju haiyaa)

और (मुनकिर) इंसान कहता है कि 'क्या जब मैं मर जाऊँगा, तो क्या मुझे दोबारा ज़िन्दा करके निकाला जाएगा?' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मरयम आयत 66 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह मरयम - आयत 66

✅ मरने के बाद दोबारा ज़िन्दगी का इनकार

काफ़िर और मुनकिर इंसान मज़ाक़ उड़ाते हुए कहता है कि जब मैं मरकर मिट्टी बन जाऊँगा, तो मुझे दोबारा कैसे ज़िन्दा किया जा सकता है? यह सवाल उसके कुफ़्र और आख़िरत के इनकार का इज़हार है।

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