कुरान - 19:73 सूरह मरयम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

73
وَإِذَا تُتۡلَىٰ عَلَيۡهِمۡ ءَايَٰتُنَا بَيِّنَٰتٖ قَالَ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ لِلَّذِينَ ءَامَنُوٓاْ أَيُّ ٱلۡفَرِيقَيۡنِ خَيۡرٞ مَّقَامٗا وَأَحۡسَنُ نَدِيّٗا

Transliteration: (Wa izaa tutlaa 'alaihim Aayaatunaa baiyinaatin qaalal lazeena kafaroo lillazeena aamanooo aiyul fareeqaini khairum maqaamanw wa ahsanu nadiyyaa)

और जब उनके सामने हमारी वाज़ेह आयतें पढ़ी जाती हैं, तो काफ़िर लोग ईमान वालों से कहते हैं, 'हम दोनों फ़रीक़ों में से किसका मर्तबा (हैसियत) बेहतर है और किसकी मजलिस ज़्यादा शानदार है?' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मरयम आयत 73 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह मरयम - आयत 73

✅ दुनियावी ठाठ-बाट पर काफ़िरों का घमंड

मक्का के दौलतमंद मुशरिक ग़रीब सहाबा (जैसे बिलाल व अम्मार) को देखकर ताना मारते थे कि अगर तुम हक़ पर होते तो हमारी तरह आलीशान महलों, महफ़िलों और दौलत के मालिक होते। वे दुनियावी ठाठ-बाट को हक़ होने का पैमाना समझते थे।

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