कुरान - 50:29 सूरह क़ाफ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

29
مَا يُبَدَّلُ ٱلۡقَوۡلُ لَدَيَّ وَمَآ أَنَا۠ بِظَلَّـٰمٖ لِّلۡعَبِيدِ

Transliteration: (Maa yubaddalul qawlu ladaiya wa maaa ana bizal laamil lil'abeed)

'मेरे यहां बात बदली नहीं जाती, और न मैं बंदों पर ज़र्रा बराबर ज़ुल्म करने वाला हूं।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह क़ाफ़ आयत 29 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह क़ाफ़ - आयत 29

✅ अटल फ़ैसला और इन्साफ़े कामिल

अल्लाह का फ़ैसला हतमी और ग़ैर-मुतबद्दिल है। किसी बेगुनाह को सज़ा नहीं दी जाएगी और न ही किसी के साथ नाइंसाफ़ी होगी; हर एक को उसके आमाल का सही बदला मिलेगा।

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