Transliteration: (Isbir 'alaa maa yaqooloona wazkur 'abdanaa Daawooda zal aidi innahooo awwaab)
"आप उनकी बातों पर सब्र फ़रमाइए [27] और हमारे क़ुव्वत वाले बंदे दाऊद को याद कीजिए [28], बेशक वे बहुत रुजूअ करने वाले थे [29]!"
हुज़ूर ﷺ को काफ़िरों की बद-ज़बानी पर सब्र फ़रमाने की हिदायत दी गई। बाद में जब जिहाद का हुक्म आया तो यह हुक्म मंसूख़ हुआ।
हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) जिस्मानी और रूहानी दोनों एतबार से अज़ीम क़ुव्वत वाले थे—एक दिन रोज़ा रखते और एक दिन इफ़्तार करते, और रात का अक्सर हिस्सा नमाज़ व इबादत में गुज़ारते थे।
वे हर हाल में और हर मुआमले में अल्लाह तआला की तरफ़ रुजूअ फ़रमाते और आजिज़ाना तौबा व इस्तिग़फ़ार करते थे।
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