कुरान - 38:17 सूरह साद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

17
ٱصۡبِرۡ عَلَىٰ مَا يَقُولُونَ وَٱذۡكُرۡ عَبۡدَنَا دَاوُۥدَ ذَا ٱلۡأَيۡدِۖ إِنَّهُۥٓ أَوَّابٌ

Transliteration: (Isbir 'alaa maa yaqooloona wazkur 'abdanaa Daawooda zal aidi innahooo awwaab)

आप उनकी बातों पर सब्र फ़रमाइए [27] और हमारे क़ुव्वत वाले बंदे दाऊद को याद कीजिए [28], बेशक वे बहुत रुजूअ करने वाले थे [29]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह साद आयत 17 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह साद तफ़सीर - आयत 17

"आप उनकी बातों पर सब्र फ़रमाइए [27] और हमारे क़ुव्वत वाले बंदे दाऊद को याद कीजिए [28], बेशक वे बहुत रुजूअ करने वाले थे [29]!"

[27] जिहाद से पहले सब्र का हुक्म

हुज़ूर ﷺ को काफ़िरों की बद-ज़बानी पर सब्र फ़रमाने की हिदायत दी गई। बाद में जब जिहाद का हुक्म आया तो यह हुक्म मंसूख़ हुआ।

[28] हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) की क़ुव्वत व इबादत

हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) जिस्मानी और रूहानी दोनों एतबार से अज़ीम क़ुव्वत वाले थे—एक दिन रोज़ा रखते और एक दिन इफ़्तार करते, और रात का अक्सर हिस्सा नमाज़ व इबादत में गुज़ारते थे।

[29] बारगाहे इलाही में कसरत से रुजूअ

वे हर हाल में और हर मुआमले में अल्लाह तआला की तरफ़ रुजूअ फ़रमाते और आजिज़ाना तौबा व इस्तिग़फ़ार करते थे।

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