Transliteration: (Innaa sakhkharnal jibaala ma'ahoo yusabbihna bil'ashiyyi wal ishraaq)
"बेशक हमने पहाड़ों को उनके ताबेदार कर दिया [30] कि वे शाम और सुबह उनके साथ तस्बीह करते थे [31] [32],"
अल्लाह तआला ने अज़ीम पहाड़ों को हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) के ताबे फ़रमा दिया था, जैसे हज़रत सुलैमान (अलैहिस्सलाम) के लिए हवा और जिन्नात को ताबे किया।
जब हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) ज़बूर की तिलावत फ़रमाते, तो पहाड़ भी बा-आवाज़े बुलंद उनके साथ तस्बीह पढ़ते और हज़रत दाऊद उनकी आवाज़ सुनते थे। यह आपका रौशन मोजिज़ा था।
सूरज ढलने और निकलने के वक़्त (फ़ज्र और अस्र) तस्बीह का ख़ास एहतिमाम था, जो इन औक़ात की अज़ीम रूहानी फ़ज़ीलत को उजागर करता है।
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