कुरान - 38:18 सूरह साद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

18
إِنَّا سَخَّرۡنَا ٱلۡجِبَالَ مَعَهُۥ يُسَبِّحۡنَ بِٱلۡعَشِيِّ وَٱلۡإِشۡرَاقِ

Transliteration: (Innaa sakhkharnal jibaala ma'ahoo yusabbihna bil'ashiyyi wal ishraaq)

बेशक हमने पहाड़ों को उनके ताबेदार कर दिया [30] कि वे शाम और सुबह उनके साथ तस्बीह करते थे [31] [32], (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह साद आयत 18 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह साद तफ़सीर - आयत 18

"बेशक हमने पहाड़ों को उनके ताबेदार कर दिया [30] कि वे शाम और सुबह उनके साथ तस्बीह करते थे [31] [32],"

[30] पहाड़ों की तसख़ीर

अल्लाह तआला ने अज़ीम पहाड़ों को हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) के ताबे फ़रमा दिया था, जैसे हज़रत सुलैमान (अलैहिस्सलाम) के लिए हवा और जिन्नात को ताबे किया।

[31] पहाड़ों का बा-आवाज़ तस्बीह पढ़ना

जब हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) ज़बूर की तिलावत फ़रमाते, तो पहाड़ भी बा-आवाज़े बुलंद उनके साथ तस्बीह पढ़ते और हज़रत दाऊद उनकी आवाज़ सुनते थे। यह आपका रौशन मोजिज़ा था।

[32] सुबह व शाम की इबादत की फ़ज़ीलत

सूरज ढलने और निकलने के वक़्त (फ़ज्र और अस्र) तस्बीह का ख़ास एहतिमाम था, जो इन औक़ात की अज़ीम रूहानी फ़ज़ीलत को उजागर करता है।

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