Transliteration: (Wattayra mahshoorah; kullul lahooo awwaab)
"और परिंदों को भी जो जमा हो जाते थे [33], सब के सब उनके ताबेदार थे [34]!"
जब हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) अपनी दिलकश आवाज़ में ज़िक्र फ़रमाते, तो आसमान में उड़ते हुए परिंदे जमा होकर रुक जाते और आपके साथ तस्बीह में शामिल हो जाते थे।
जब पहाड़ और परिंदे हज़रत दाऊद के ताबे थे, तो हमारे आक़ा व मौला हुज़ूर सय्यिदे आलम ﷺ की सल्तनत और इख़्तियार तो पूरी कायनात के ज़र्रे-ज़र्रे पर मुहीत है।
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