Transliteration: (Wa hal ataaka naba'ul khasm; iz tasawwarul mihraab)
"और क्या आपके पास उन झगड़ने वालों की ख़बर पहुंची [37] जब वे दीवार फांद कर इबादतगाह (मेहराब) में आ पहुंचे [38]?"
वे दो फ़रिश्ते थे जो इंसानी शक्ल में झगड़ने वालों के लिबास में आए थे ताकि हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) के सामने एक इलाही तमसील और सबक़ पेश करें।
वे दीवार फांद कर मेहराब में आ गए जहाँ हज़रत दाऊद इबादत में मसरूफ़ थे। इससे यह भी साबित होता है कि मस्जिद या इबादतगाह में मुक़द्दमात का शरई फ़ैसला करना जाइज़ है।
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