कुरान - 38:22 सूरह साद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

22
إِذۡ دَخَلُواْ عَلَىٰ دَاوُۥدَ فَفَزِعَ مِنۡهُمۡۖ قَالُواْ لَا تَخَفۡۖ خَصۡمَانِ بَغَىٰ بَعۡضُنَا عَلَىٰ بَعۡضٖ فَٱحۡكُم بَيۡنَنَا بِٱلۡحَقِّ وَلَا تُشۡطِطۡ وَٱهۡدِنَآ إِلَىٰ سَوَآءِ ٱلصِّرَٰطِ

Transliteration: (Iz dakhaloo 'alaa Daawooda fafazi'a minhum qaaloo laa takhaf khasmaani baghaa ba'dunaa 'alaa ba'din fahkum bainanaaa bilhaqqi wa laa tushtit wahdinaaa ilaa Sawaaa'is Siraat)

जब वे दाऊद के पास आए तो वे उनसे चौंक गए [39], उन्होंने कहा: डरिए मत [40]! हम दो फ़रीक़ हैं, हममें से एक ने दूसरे पर ज़्यादती की है [41], पस आप हमारे दरमियान हक़ के साथ फ़ैसला कीजिए और नाइंसाफ़ी न कीजिए [42] और हमें सीधे रास्ते की रहनुमाई फ़रमाइए। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह साद आयत 22 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह साद तफ़सीर - आयत 22

"जब वे दाऊद के पास आए तो वे उनसे चौंक गए [39], उन्होंने कहा: डरिए मत [40]! हम दो फ़रीक़ हैं, हममें से एक ने दूसरे पर ज़्यादती की है [41], पस आप हमारे दरमियान हक़ के साथ फ़ैसला कीजिए और नाइंसाफ़ी न कीजिए [42] और हमें सीधे रास्ते की रहनुमाई फ़रमाइए।"

[39] हज़रत दाऊद का चौंकना

दरवाज़ा बंद होने के बावजूद अचानक अजनबियों को देखकर हज़रत दाऊद मुतफ़क्किर हुए। सूफ़ी-ए-किराम फ़रमाते हैं कि यह ख़ौफ़ किसी जान का नहीं बल्कि अल्लाह की बारगाह का ख़ौफ़ था कि कोई ग़ैबी अम्र दरपेश है।

[40] नबी को तसल्ली

फ़रिश्तों ने अर्ज़ किया कि "ख़ौफ़ न कीजिए", क्योंकि अंबिया महफ़ूज़ होते हैं और उनकी पनाह में मख़्लूक़ को अमन मिलता है।

[41] फ़र्ज़ी मुक़द्दमे से तालीम

यह एक फ़र्ज़ी सूरत-ए-हाल थी ताकि हज़रत दाऊद को एक नाज़ुक शरई अम्र की तरफ़ मुतवज्जेह किया जाए। फ़िक़्ह में ऐसी मिसालें (जैसे ज़ैद व अम्र) बयान करना जाइज़ है।

[42] क़ाज़ी को अदल की ताकीद

उनका यह कहना कि "बेइंसाफ़ी न कीजिए" क़ाज़ी को अदल की याद दिलाना है जो शरअन जाइज़ और बा-अदब दरख़्वास्त है।

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