कुरान - 34:11 सूरह सबअ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

11
أَنِ ٱعۡمَلۡ سَٰبِغَٰتٖ وَقَدِّرۡ فِي ٱلسَّرۡدِۖ وَٱعۡمَلُواْ صَٰلِحًاۖ إِنِّي بِمَا تَعۡمَلُونَ بَصِيرٞ

Transliteration: (Ani'mal saabighaatinw wa qaddir fis sardi wa'maloo saalihan innee bimaa ta'maloona Baseer)

कि "कुशादा ज़िरहें बनाओ और उनकी कड़ियों में अंदाज़ा (बराबर पैमाना) रखो [33], और तुम सब नेक अमल करो; बेशक मैं तुम्हारे आमाल को ख़ूब देख रहा हूँ।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह सबअ आयत 11 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह सबा तफ़सीर - आयत 11

"कि कुशादा ज़िरहें बनाओ और उनकी कड़ियों में अंदाज़ा रखो [33], और तुम सब नेक अमल करो; बेशक मैं तुम्हारे आमाल को ख़ूब देख रहा हूँ।"

[33] ज़िरह-साज़ी की हिकमत और हुनरमंदी

अल्लाह तआला ने हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) को बग़ैर किसी उस्ताद के जंगी ज़िरहें (बख़्तर) बनाने की कामिल महारत सिखाई। आपको हुक्म दिया गया कि ज़िरह के हल्क़ों (कड़ियों) को एक अंदाज़े और तनासुब पर रखें—न बहुत बारीक कि कमज़ोर हों, और न बहुत मोटे कि वज़नी हो जाएं। यह हुनरमंदी इंसानी फ़ायदे और हिफ़ाज़त के लिए एक अज़ीम इलाही नेमत थी।

नेक आमाल और हर हाल में अल्लाह की निगरानी

दस्तकारी और हुनर के साथ ही अल्लाह ने आमाले सालेहा की पाबंदी का हुक्म दिया। यह वाज़ेह करता है कि दुनियावी पेशा और इबादत दोनों में दयानतदारी और तक़वा लाज़िमी है, क्योंकि अल्लाह तआला हर अमल को देख रहा है और नियतों के मुताबिक़ ही जज़ा अता फ़रमाता है।

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