Transliteration: (Wa laqad aatainaa Daawooda minnaa fadlany yaa jibaalu awwibee ma'ahoo wattaira wa alannaa lahul hadeed)
"और बेशक हमने दाऊद को अपनी तरफ़ से बड़ा फ़ज़्ल अता फ़रमाया [30]; ऐ पहाड़ो! उसके साथ तस्बीह दोहराओ, और ऐ परिंदो तुम भी [31]! और हमने उसके लिए लोहे को नर्म कर दिया [32]।"
अल्लाह तआला ने हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) को नबुव्वत और सल्तनत दोनों नेमतें एक साथ अता फ़रमाईं, जो दीन व दुनिया की जामेअ रियासत का बेहतरीन नमूना थी। इसके साथ ही आपको ख़ास मौजिज़ात और रूहानी कमालात से नवाज़ा गया जिनका ज़िक्र अगली आयात में है।
जब हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) ज़बूर शरीफ़ की तिलावत फ़रमाते और अल्लाह की हम्दो सना करते, तो पहाड़ और हवा में उड़ते परिंदे भी आपके साथ बुलंद आवाज़ में तस्बीह पढ़ते थे। अगरचे कायनात की हर शै अल्लाह की तस्बीह करती है, मगर पहाड़ों और परिंदों का इंसानों की तरह साफ़ आवाज़ में हम-नवा होना हज़रत दाऊद का खुला मौजिज़ा और उनकी मक़बूलियत की दलील थी।
अल्लाह तआला ने सख़्त लोहे को हज़रत दाऊद के हाथ में मोम या गूंथे हुए आटे की तरह नर्म कर दिया, ताकि वे आग में तपाए और हथौड़े मारे बग़ैर उससे जो चाहें बना लें। यह मौजिज़ा ख़ुद-दारी और हलाल रिज़्क़ की दुआ के नतीजे में मिला था। जब फ़रिश्ते ने उन्हें बैतुल माल से लेने के बजाय अपने हाथ की कमाई की तरग़ीब दी, तो उन्होंने दुआ फ़रमाई, और अल्लाह ने यह हुनर व मौजिज़ा अता फ़रमाया जिससे वे ज़िरहें बना कर हलाल रोज़ी कमाते थे।
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