कुरान - 34:54 सूरह सबअ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

54
وَحِيلَ بَيۡنَهُمۡ وَبَيۡنَ مَا يَشۡتَهُونَ كَمَا فُعِلَ بِأَشۡيَاعِهِم مِّن قَبۡلُۚ إِنَّهُمۡ كَانُواْ فِي شَكّٖ مُّرِيبِۭ

Transliteration: (Wa heela bainahum wa baina maa yashtahoona kamaa fu'ila bi-ashyaa'ihim min qabl; innahum kaanoo fee shakkin mureeb (section 6))

और उनके और उनकी ख़्वाहिशात (ईमान व नजात) के दरमियान रुकावट डाल दी गई [151], जैसा कि इससे पहले उनके हम-मसलक लोगों के साथ किया गया था [152]; बेशक वे बड़े बेचैन करने वाले शक में पड़े हुए थे [153]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह सबअ आयत 54 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह सबा तफ़सीर - आयत 54

"और उनके और उनकी ख़्वाहिशात के दरमियान रुकावट डाल दी गई [151], जैसा कि इससे पहले उनके जैसों के साथ किया गया था [152]। बेशक वे बड़े बेचैन करने वाले शक में पड़े हुए थे [153]।"

[151] तौबा और नजात के दरमियान दायमी हिजाब

मौत और अज़ाब के आते ही तौबा का दरवाज़ा हमेशा के लिए बंद हो जाता है। उनकी आरज़ू होगी कि काश वे मुसलमान हो जाएं, मगर उनके और इस आरज़ू के दरमियान रुकावट खड़ी कर दी जाएगी।

[152] पिछली सरकश क़ौमों की मिसाल

फ़िरऔन ने भी डूबते वक़्त ईमान का दावा किया था मगर वह मुस्तरद कर दिया गया। पिछली तमाम हलाक शुदा क़ौमों के साथ भी यही सुलूक हुआ था।

[153] बेचैन करने वाले शक व शुबहे का वबाल

वे दुनिया में पुख़्ता यक़ीन हासिल करने के बजाय मुसलसल शक, तज़बज़ुब और हठधर्मी में मुब्तला रहे, जिसने आख़िरकार उन्हें दायमी अज़ाब के गढ़े में धकेल दिया।

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