कुरान - 34:49 सूरह सबअ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

49
قُلۡ جَآءَ ٱلۡحَقُّ وَمَا يُبۡدِئُ ٱلۡبَٰطِلُ وَمَا يُعِيدُ

Transliteration: (Qul jaaa'al haqqu wa maa yubdi'ul baatilu wa maa yu'eed)

आप कह दीजिए, "हक़ आ गया, और बातिल न तो कोई नई चीज़ पैदा कर सकता है और न दोबारा लौटा सकता है [144]!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह सबअ आयत 49 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह सबा तफ़सीर - आयत 49

"आप कह दीजिए: 'हक़ आ गया, और बातिल न तो कोई नई चीज़ पैदा कर सकता है और न दोबारा लौटा सकता है [144]!'"

[144] 'जाअल हक़्क़ु व ज़हक़ल बातिल' - हक़ का दायमी ग़लबा

फ़तहे मक्का के रोज़ हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ ने ख़ाना-ए-काबा में दाख़िल होकर 360 बुतों को अपनी छड़ी के इशारे से गिराते हुए इसी आयत की तिलावत फ़रमाई थी। हक़ के आ जाने के बाद बातिल बे-जान, बे-असर और ज़लील हो गया।

हरमैन शरीफ़ैन शिर्क व बुत-परस्ती से हमेशा के लिए पाक

इस मुबारक फ़रमान की बरकत से मक्का मुकर्रमा और मदीना मुनव्वरा में क़यामत तक कभी शिर्क व बुत-परस्ती दोबारा क़ायम नहीं हो सकती; ख़ाना-ए-काबा हमेशा के लिए तौहीद का मरकज़ बन चुका है।

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