कुरान - 34:48 सूरह सबअ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

48
قُلۡ إِنَّ رَبِّي يَقۡذِفُ بِٱلۡحَقِّ عَلَّـٰمُ ٱلۡغُيُوبِ

Transliteration: (Qul inna Rabbee yaqzifu bilhaqq 'Allaamul Ghuyoob)

आप कह दीजिए, "बेशक मेरा रब हक़ को (नाज़िल) फ़रमाता है [142], जो ऐन सच्चा है [143]; वह तमाम ग़ैब की बातों का ख़ूब जानने वाला है।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह सबअ आयत 48 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह सबा तफ़सीर - आयत 48

"आप कह दीजिए: 'बेशक मेरा रब हक़ को नाज़िल फ़रमाता है [142], जो सच्चा है [143]; वह तमाम ग़ैब की बातों का ख़ूब जानने वाला है।'"

[142] हक़ की वह्य और हुज़ूर ﷺ के सीना-ए-अक़दस का नूर

यह आयत वाज़ेह फ़रमाती है कि क़ुरआन के नुज़ूल से पहले भी हक़ हुज़ूर ﷺ के क़ल्बे मुबारक़ में मौजूद था। अल्लाह ने अपने महबूब को अज़ल ही से हक़ व सदाक़त का मुजस्समा बनाया है।

[143] हक़ से मुराद क़ुरआन, इस्लाम और ज़ात-ए-मुस्तफ़ा ﷺ

यहाँ "हक़" से मुराद क़ुरआने पाक, दीने इस्लाम और ख़ुद हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ की ज़ात है। जिस तरह सोने की कान से सिर्फ़ ख़ालिस सोना निकलता है, उसी तरह हुज़ूर ﷺ के हर क़ौल व अमल से सिर्फ़ हक़ सादिर होता है।

'अल्लामुल ग़ुयूब' परवरदिगार

अल्लाह तआला तमाम पोशीदा और ग़ैबी हक़ायक़ का मुकम्मल इल्म रखता है; वही अपने रसूल की सच्चाई पर सबसे बड़ा गवाह है।

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