Transliteration: (Qul in dalaltu fainnamaaa adillu 'alaa nafsee wa inih-tadaitu fabimaa yoohee ilaiya Rabbee; innahoo Samee'un Qareeb)
"आप कह दीजिए: 'अगर मैं गुमराह हो जाऊं तो मेरी गुमराही का वबाल मुझ पर होगा [145]। और अगर मैं हिदायत पर हूँ तो यह उस वह्य के बाइस है जो मेरा रब मेरी तरफ़ भेजता है [146]। बेशक वह सब कुछ सुनने वाला, बहुत क़रीब है।'"
यह कलाम मुंसिफ़ाना अंदाज़ में काफ़िरों को समझाने के लिए है। हर शख़्स अपनी गुमराही का ख़ुद ज़िम्मेदार है; कोई किसी दूसरे का बोझ नहीं उठाएगा।
हुज़ूर ﷺ फ़रमाते हैं कि मेरी तमाम हिदायत और नुबुव्वत का सरचश्मा वह वह्ये इलाही है जो अल्लाह की तरफ़ से नाज़िल होती है। अल्लाह अपने बंदों की दुआओं को सुनने वाला और निहायत क़रीब है।
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