कुरान - 34:50 सूरह सबअ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

50
قُلۡ إِن ضَلَلۡتُ فَإِنَّمَآ أَضِلُّ عَلَىٰ نَفۡسِيۖ وَإِنِ ٱهۡتَدَيۡتُ فَبِمَا يُوحِيٓ إِلَيَّ رَبِّيٓۚ إِنَّهُۥ سَمِيعٞ قَرِيبٞ

Transliteration: (Qul in dalaltu fainnamaaa adillu 'alaa nafsee wa inih-tadaitu fabimaa yoohee ilaiya Rabbee; innahoo Samee'un Qareeb)

आप कह दीजिए, "अगर मैं (बिलफ़र्ज़) गुमराह हो जाऊं तो मेरी गुमराही का वबाल मेरी ही ज़ात पर होगा [145], और अगर मैं हिदायत पर हूँ तो यह उस वह्य के बाइस है जो मेरा रब मेरी तरफ़ भेजता है [146]; बेशक वह सब कुछ सुनने वाला, बहुत क़रीब है।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह सबअ आयत 50 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह सबा तफ़सीर - आयत 50

"आप कह दीजिए: 'अगर मैं गुमराह हो जाऊं तो मेरी गुमराही का वबाल मुझ पर होगा [145]। और अगर मैं हिदायत पर हूँ तो यह उस वह्य के बाइस है जो मेरा रब मेरी तरफ़ भेजता है [146]। बेशक वह सब कुछ सुनने वाला, बहुत क़रीब है।'"

[145] गुमराही का वबाल ख़ुद गुमराह पर

यह कलाम मुंसिफ़ाना अंदाज़ में काफ़िरों को समझाने के लिए है। हर शख़्स अपनी गुमराही का ख़ुद ज़िम्मेदार है; कोई किसी दूसरे का बोझ नहीं उठाएगा।

[146] हिदायत का सरचश्मा वह्य-ए-इलाही है

हुज़ूर ﷺ फ़रमाते हैं कि मेरी तमाम हिदायत और नुबुव्वत का सरचश्मा वह वह्ये इलाही है जो अल्लाह की तरफ़ से नाज़िल होती है। अल्लाह अपने बंदों की दुआओं को सुनने वाला और निहायत क़रीब है।

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