Transliteration: (Wa qaaloo aamannaa bihee wa annaa lahumut tanaawushu min makaanin ba'eed)
"और वे कहेंगे: 'हम उस पर ईमान लाए!' और इतनी दूर की जगह से ईमान का हाथ आना कैसे मुम्किन हो सकता है [149]?"
मौत या अज़ाब का मुशाहदा करने के बाद काफ़िर चीख़-पुकार करेंगे कि हम ईमान ले आए, मगर वक़्त गुज़र जाने के बाद का ईमान कोई फ़ायदा नहीं देता। आख़िरत दारुल जज़ा है, दारुल अमल नहीं; लिहाज़ा वहाँ से ईमान का तलब करना ऐसा ही नामुम्किन है जैसे कोई दूर से किसी चीज़ को पकड़ना चाहे।
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