Transliteration: (Qul maa sa-altukum min ajrin fahuwa lakum in ajriya illaa 'alal laahi wa Huwa 'alaa kulli shai'in Shaheed)
"आप कह दीजिए: 'जो बदला मैंने तुमसे मांगा हो वह तुम्हारे ही लिए रहे [139]। मेरा अज्र तो बस अल्लाह के ज़िम्मे है [140], और वह हर चीज़ पर गवाह है [141]।'"
हुज़ूर नबी-ए-अकरम ﷺ ने वाज़ेह फ़रमाया कि अल्लाह का पैग़ाम पहुँचाने के बदले मैंने तुमसे कोई दुनियावी माल या उजरत तलब नहीं की। नबी की तब्लीग़ महज़ उम्मत की हिदायत और भलाई के लिए होती है।
रसूलुल्लाह ﷺ की बे-मिसाल मेहनत और मशक़्क़त का हक़ीक़ी और दायमी अज्र सिर्फ़ अल्लाह तआला के पास है, जो अपनी शान के मुताबिक़ अपने हबीब को रज़ा व मक़ामे महमूद अता फ़रमाएगा।
अल्लाह तआला हर ज़ाहिर व बातिन नीयत और अमल पर गवाह है। वह नबी के इख़्लास को भी जानता है और काफ़िरों की सरकशी को भी; वही क़यामत के दिन कामिल इंसाफ़ से फ़ैसला फ़रमाएगा।
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