कुरान - 34:8 सूरह सबअ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

8
أَفۡتَرَىٰ عَلَى ٱللَّهِ كَذِبًا أَم بِهِۦ جِنَّةُۢۗ بَلِ ٱلَّذِينَ لَا يُؤۡمِنُونَ بِٱلۡأٓخِرَةِ فِي ٱلۡعَذَابِ وَٱلضَّلَٰلِ ٱلۡبَعِيدِ

Transliteration: (Aftaraa 'alal laahi kaziban am bihee jinnah; balil lazeena laa yu'minoona bil Aakhirati fil'azaabi wad dalaalil ba'eed)

"क्या उसने अल्लाह पर झूठा बोहतान बांधा है या उसे कोई जुनून (दीवानगी) है [25]?" बल्कि जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं रखते वे अज़ाब में और दूर की गुमराही में पड़े हैं [26]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह सबअ आयत 8 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह सबा तफ़सीर - आयत 8

"क्या उसने अल्लाह पर झूठा बोहतान बांधा है या उसे कोई जुनून है [25]? बल्कि जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं रखते वे अज़ाब में और दूर की गुमराही में पड़े हैं [26]।"

[25] बोहतान व जुनून के इल्ज़ाम का रद्द और इस्मत-ए-अंबिया

काफ़िर हुज़ूर ﷺ पर यह झूठी तोहमत लगाते थे कि मआज़ल्लाह आपने अल्लाह पर झूठ बांधा है या आपको जुनून हो गया है। यह इल्ज़ाम मंसब-ए-नबुव्वत की हक़ीक़त से बिल्कुल मुतज़ाद है। तमाम अंबिया-ए-किराम मासूम होते हैं और जुनून, बहरेपन या गूंगेपन जैसे तमाम उन अमराज़ से महफ़ूज़ होते हैं जो तब्लीग़े रिसालत में रुकावट बनें। हाँ, ग़शी या बे-होशी जैसी आरज़ी कैफ़ियत किसी वक़्त आ सकती है, जैसा कि हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) के बारे में फ़रमाया: "और मूसा बे-होश होकर गिर पड़े" (सूरह आराफ़, 7:143)।

[26] मुनकिरीने आख़िरत की गुमराही और अज़ाब

क़ुरआन ने काफ़िरों के बातिल दावों को रद्द करते हुए वाज़ेह किया कि असल गुमराही और अज़ाब में तो ख़ुद मुनकिरीने आख़िरत मुब्तला हैं। अल्लाह के सच्चे रसूल को झूठा या मजनून कहना गुमराही की इन्तिहा है, और रसूल की शान में गुस्ताख़ी इंसान को दायमी हलाकत और अज़ाब की तरफ़ ले जाती है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now