कुरान - 34:6 सूरह सबअ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

6
وَيَرَى ٱلَّذِينَ أُوتُواْ ٱلۡعِلۡمَ ٱلَّذِيٓ أُنزِلَ إِلَيۡكَ مِن رَّبِّكَ هُوَ ٱلۡحَقَّ وَيَهۡدِيٓ إِلَىٰ صِرَٰطِ ٱلۡعَزِيزِ ٱلۡحَمِيدِ

Transliteration: (Wa yaral lazeena ootul 'ilmal lazeee unzila ilaika mir Rabbika huwal haqqa wa yahdeee ilaaa siraatil 'Azeezil Hameed)

और जिन्हें इल्म दिया गया है [18] वे जानते हैं [19] कि जो कुछ आपके रब की तरफ़ से आपकी तरफ़ नाज़िल किया गया है [20] वही सच्चा हक़ है, और वह ज़बरदस्त ग़ालिब, हर तारीफ़ के लायक़ (अल्लाह) की राह दिखाता है [21]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह सबअ आयत 6 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह सबा तफ़सीर - आयत 6

"और जिन्हें इल्म दिया गया है [18] वे जानते हैं [19] कि जो कुछ आपके रब की तरफ़ से आपकी तरफ़ नाज़िल किया गया है [20] वही सच्चा हक़ है, और वह ज़बरदस्त ग़ालिब, हर तारीफ़ के लायक़ (अल्लाह) की राह दिखाता है [21]।"

[18] हक़ीक़ी इल्म वाले (उलमा व औलिया)

इससे मुराद वे साहेबाने बसीरत व मारिफ़त हैं जिनके सीनों को अल्लाह ने नूरे इल्म व हिकमत से मुनव्वर फ़रमाया है—ख्वाह वे पिछली किताबों के मुंसिफ़-मिज़ाज उलमा हों या इस उम्मत के रासिख़ उलमा और औलिया-ए-किराम। उनका यक़ीन महज़ रस्मी नहीं बल्कि रूहानी बसीरत और दिल के यक़ीन पर क़ायम होता है।

[19] वह्य की हक़्क़ानियत की पहचान

ऐसे अहले इल्म ब-ख़ूबी पहचानते हैं कि हुज़ूर नबी-ए-अकरम ﷺ पर नाज़िल होने वाला क़ुरआन ऐन हक़ और सदाक़त है। इसकी तालीमात की गहराई, बे-मिसाल फ़साहत और इंसानी ज़िंदगी को बदल देने वाला असर इस बात की गवाही देता है कि यह किसी इंसान का कलाम नहीं हो सकता।

[20] परवरदिगार की तरफ़ से नाज़िल शुदा कलाम

आयत इस बात पर ज़ोर देती है कि यह कलाम आपके परवरदिगार की जानिब से है, जो इसकी सच्चाई और सनद को हर तरह के शक व शुबहे से पाक कर देता है। अहले बसीरत इस हक़ीक़त को पहले ही लम्हे में तस्लीम कर लेते हैं।

[21] अज़ीज़ व हमीद ख़ुदा की सीधी राह

क़ुरआने पाक जिस रास्ते की रहनुमाई करता है वह अल्लाह तआला का रास्ता है जो 'अल-अज़ीज़' (ज़बरदस्त ग़ालिब) और 'अल-हमीद' (हर तारीफ़ का हक़दार) है। इस राह पर चलने वाला इज़्ज़त, हिकमत और दारैन की फ़लाह हासिल करता है, और उस रब्बे करीम की रज़ा पाता है जिसकी बादशाही और हम्द अज़ल से अबद तक क़ायम है।

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