कुरान - 34:4 सूरह सबअ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

4
لِّيَجۡزِيَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّـٰلِحَٰتِۚ أُوْلَـٰٓئِكَ لَهُم مَّغۡفِرَةٞ وَرِزۡقٞ كَرِيمٞ

Transliteration: (Liyajziyal lazeena aamanoo wa 'amilus saalihaat; ulaaa'ika lahum maghfiratunw wa rizqun kareem)

ताकि वह उन लोगों को जज़ा (बदला) दे जो ईमान लाए और उन्होंने नेक अमल किए [14]; यही लोग हैं जिनके लिए मग़फ़िरत और इज़्ज़तदार रिज़्क़ है [15]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह सबअ आयत 4 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह सबा तफ़सीर - आयत 4

"ताकि वह उन लोगों को जज़ा दे जो ईमान लाए और उन्होंने नेक अमल किए [14]; यही लोग हैं जिनके लिए मग़फ़िरत और इज़्ज़तदार रिज़्क़ है [15]।"

[14] जज़ा व सज़ा के ज़रिये क़यामत का सुबूत

यह आयत क़यामत के वुजूद पर एक अक़्ली और इंसाफ़ पर मबनी दलील पेश करती है: जिस तरह दुनिया में मालिक अपने वफ़ादार ख़ादिमों को सिला और नाफ़रमानों को सज़ा देता है, उसी तरह अल्लाह तआला—जो अहकमुल हाकिमीन है—अपने नेक और फ़रमांबरदार बंदों को उनकी नेकियों का भरपूर बदला अता फ़रमाएगा। वही अद्ल व इंसाफ़ और जज़ा का मुक़र्ररा दिन क़यामत है, और अल्लाह का यह इंसाफ़ ही हम्द व तारीफ़ के लायक़ है।

[15] जन्नत का बा-वक़ार और इज़्ज़तदार रिज़्क़

जन्नत में मिलने वाली नेमतें और रिज़्क़ इन्तहाई इज़्ज़त और एहतराम के साथ अता होगा, जिसमें किसी तरह की मेहनत या मशक़्क़त की हाजत न होगी। यह नेमत रहमत-ए-इलाही का मज़हर है।

अल्लाह का उसूल यह है कि जन्नत आमाले सालेहा की बिना पर मिलती है, मगर उसका फ़ज़्ल व करम इतना वसीअ है कि वह अपने नेक बंदों की शफ़ाअत और वसीले से भी गुनाहगारों को बख़्श कर जन्नतुल फ़िरदौस का मुस्तहक़ बना देता है।

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