Transliteration: (Ya'lamu maa yaliju fil ardi wa maa yakhruju minhaa wa maa yanzilu minas samaaa'i wa maa ya'ruju feehaa; wa Huwar Raheemul Ghafoor)
"वह जानता है जो कुछ ज़मीन में दाख़िल होता है [5] और जो कुछ उससे निकलता है [6], और जो कुछ आसमान से उतरता है [7] और जो कुछ उसमें चढ़ता है [8]; और वही निहायत रहम फ़रमाने वाला, बहुत बख़्शने वाला है [9]।"
इसमें वे तमाम चीज़ें शामिल हैं जो ज़मीन की तह में जाती हैं, जैसे मुर्दे (दफ़्न होने वाले इंसान व जानवर), दफ़न शुदा ख़ज़ाने, मादनियात, बारिश के क़तरे, ज़मीन में बोए जाने वाले बीज और नुत्फ़े। ग़रज़ यह कि ज़मीन के अंदर दाख़िल होने वाली हर एक शै का मुकम्मल इल्म अल्लाह को है, ख्वाह वह छुपी हो या ज़ाहिर, बड़ी हो या बारीक। कोई भी शै उसके इल्म व क़ुदरत से बाहर नहीं।
इससे मुराद नबातात, पेड़-पौधे, सब्ज़ा, पानी के चश्मे, क़ीमती मादनियात और यहाँ तक कि क़यामत के दिन क़ब्रों से दोबारा ज़िंदा होकर निकलने वाले इंसान हैं। ज़मीन के सीने से जो कुछ भी बाहर आता है, वह सब अल्लाह के हुक्म और उसके इल्मे कामिल के तहत ही वजूद में आता है, जो उसकी क़ुदरते कामिला की रौशन दलील है।
बारिश, ओले, बर्फ़ से लेकर मुक़र्रब फ़रिश्ते, आसमानी सहीफ़े व किताबें, रिज़्क़ की नेमतें और तक़दीर के इलाही फ़ैसले—यह सब कुछ अल्लाह के इरादे और इल्म से नाज़िल होता है। कायनात की कोई भी शै उसके हुक्म के बग़ैर आसमान से नीचे नहीं उतरती।
इसमें ज़मीन से उठने वाले बुख़ारात, बादल, खिदमत अंजाम देकर लौटने वाले फ़रिश्ते, और अल्लाह के नेक बंदों की पाकीज़ा रूहें, दुआएं और आमाले सालेहा शामिल हैं। जो कुछ भी ऊपर की जानिब सुऊद करता (चढ़ता) है, वह सब बारगाह-ए-इलाही में पेश होता है और उसकी निगाह में रहता है।
अल्लाह तआला वह बुलन्द व बरतर परवरदिगार है जिसका इल्म हर जलील व लतीफ़ शै पर मुहीत है। यह आयत पिछली आयत की ताईद करती है कि वही ज़ात हक़ीक़ी हम्द व तारीफ़ की मुस्तहक़ है। उसका यह बे-पायां इल्म उसकी बे-मिसाल रहमत और मग़फ़िरत के साथ मिला हुआ है, जिससे साबित होता है कि वह हर हाल में इबादत व बंदगी का हक़दार है।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat