कुरान - 34:7 सूरह सबअ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

7
وَقَالَ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ هَلۡ نَدُلُّكُمۡ عَلَىٰ رَجُلٖ يُنَبِّئُكُمۡ إِذَا مُزِّقۡتُمۡ كُلَّ مُمَزَّقٍ إِنَّكُمۡ لَفِي خَلۡقٖ جَدِيدٍ

Transliteration: (Wa qaalal lazeena kafaroo hal nadullukum 'alaa rajuliny yunabbi 'ukum izaa muzziqtum kulla mumazzaqin innakum lafee khalqin jadeed)

और काफ़िरों ने (मज़ाक़ उड़ाते हुए) कहा, "क्या हम तुम्हें ऐसा आदमी बताएं [22] जो तुम्हें ख़बर देता है कि जब तुम बिल्कुल टुकड़े-टुकड़े होकर (रेज़ा-रेज़ा) हो जाओगे [23], तो तुम ज़रूर एक नई पैदाइश में आओगे [24]?" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह सबअ आयत 7 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह सबा तफ़सीर - आयत 7

"और काफ़िरों ने कहा: 'क्या हम तुम्हें ऐसा आदमी बताएं [22] जो तुम्हें ख़बर देता है कि जब तुम टुकड़े-टुकड़े होकर रेज़ा-रेज़ा हो जाओगे [23], तो तुम ज़रूर एक नई पैदाइश में आओगे [24]?'"

[22] नबी-ए-करीम ﷺ की शान में गुस्ताख़ाना अंदाज़ की मज़म्मत

मुशरिकीन-ए-मक्का हठधर्मी में आकर हुज़ूर नबी-ए-अकरम ﷺ की अज़ीम ज़ात के लिए "एक आदमी" या "शख़्स" जैसे आम और बे-अदबाना अल्फ़ाज़ इस्तेमाल करते थे ताकि आपकी अज़मत को कम कर सकें। यह मुनकिरीने नबुव्वत का पुराना तरीक़ा है। इसके बर-अक्स ईमान वालों को हुक्म है कि हुज़ूर ﷺ को अदब व एहतिराम और अज़ीम अल्क़ाब (रसूलुल्लाह, हबीबुल्लाह, शफ़ीउल मुज़्निबीन) से याद करें, जैसा कि फ़रमाया: "रसूल के पुकारने को आपस में ऐसा न ठहराओ जैसा तुम में से एक दूसरे को पुकारता है" (सूरह नूर, 24:63)।

[23] रेज़ा-रेज़ा होने के बाद दोबारा ज़िंदा किए जाने पर ताज्जुब

काफ़िर मौत के बाद दोबारा जी उठने (बाअस बाद अल-मौत) का मज़ाक़ उड़ाते थे कि जब इंसान का जिस्म सड़-गल कर ख़ाक और बारीक ज़र्रात में तब्दील हो जाएगा, तो वह फिर कैसे ज़िंदा होगा? हालांकि वे भूल गए कि हक़ीक़ी अज्ज़ा (जौहरे फ़र्द) कभी फ़ना नहीं होते; अल्लाह के इल्म में हर ज़र्रा महफ़ूज़ रहता है और वही उन्हें दोबारा यकजा फ़रमाएगा।

[24] बाअस बाद अल-मौत और जिस्मानी हक़ीक़त

हश्र के दिन इंसान को उसके अस्ली जिस्मानी अज्ज़ा के साथ ही उठाया जाएगा, लेकिन बदनों की ज़ाहिरी हालत उनके आमाल के मुताबिक़ मुख़्तलिफ़ होगी। ईमान वाले चेहरे नूरानी और चमकदार होंगे, जबकि मुनकिरीन और मुजरिमों के चेहरे स्याह और बिगड़े हुए होंगे। यह तब्दीली रंग-रूप की नहीं बल्कि उनके आमाल और रूहानी हालत का आईना होगी।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now