Transliteration: (Wallazeena yas'awna feee Aayaatinaa mu'aajizeena ulaaa'ika fil'azaabi muhdaroon)
"और जो लोग हमारी आयतों को आजिज़ करने की कोशिश करते हैं [115], वे अज़ाब में हाज़िर किए जाएंगे [116]।"
इससे मुराद वे मुफ़्सिद हैं जो क़ुरआने करीम के ख़िलाफ़ छुपकर शुबहात फैलाते हैं और उसकी आयतों के ग़लत मफ़हूम गढ़ते हैं ताकि लोगों को गुमराह कर सकें। यह अमल हक़ के बुग्ज़ और तकब्बुर पर मबनी है।
क़ुरआन की आयतों को महज़ अपनी झूठी बड़ाई या मुनाज़रे जीतने के लिए इस्तेमाल करना सख्त गुनाह है। सबसे संगीन जुर्म यह है कि कोई बद-बख़्त आयतों को हुज़ूर ﷺ की अज़मत घटाने के लिए इस्तेमाल करे; ऐसे लोग क़यामत में ज़ंजीरों में जकड़ कर दोज़ख़ के अज़ाब में पेश किए जाएंगे।
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