Transliteration: (Qul inna Rabbee yabsutur rizqa limai yashaaa'u wa yaqdiru wa laakinna aksaran naasi laa ya'lamoon (section 4))
"आप कह दीजिए: 'बेशक मेरा रब जिसके लिए चाहता है रिज़्क़ कुशादा करता है और जिसके लिए चाहता है तंग करता है। लेकिन अक्सर लोग नहीं जानते [110]।'"
अल्लाह तआला काफ़िरों के बातिल दावे का रद्द फ़रमाता है कि रिज़्क़ की कमी या ज़्यादती अल्लाह की हिकमत और आज़माइश पर मबनी है, न कि किसी की नेकी या बदी की सनद। अल्लाह काफ़िर को भी दुनियावी दौलत अता फ़रमाता है और मोमिन को भी आज़माइश के लिए तंगी में रखता है। दुनिया में दाना और भूसा एक साथ रहते हैं, मगर आख़िरत में हक़ और बातिल को अलग कर दिया जाएगा। अफ़सोस कि अक्सर लोग इस हिकमत को नहीं समझते।
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