कुरान - 34:36 सूरह सबअ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

36
قُلۡ إِنَّ رَبِّي يَبۡسُطُ ٱلرِّزۡقَ لِمَن يَشَآءُ وَيَقۡدِرُ وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَ ٱلنَّاسِ لَا يَعۡلَمُونَ

Transliteration: (Qul inna Rabbee yabsutur rizqa limai yashaaa'u wa yaqdiru wa laakinna aksaran naasi laa ya'lamoon (section 4))

आप कह दीजिए, "बेशक मेरा रब जिसके लिए चाहता है रिज़्क़ कुशादा करता है और जिसके लिए चाहता है तंग करता है, लेकिन अक्सर लोग नहीं जानते [110]।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह सबअ आयत 36 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह सबा तफ़सीर - आयत 36

"आप कह दीजिए: 'बेशक मेरा रब जिसके लिए चाहता है रिज़्क़ कुशादा करता है और जिसके लिए चाहता है तंग करता है। लेकिन अक्सर लोग नहीं जानते [110]।'"

[110] रिज़्क़ की तक़सीम इलाही आज़माइश है, मक़बूलियत की सनद नहीं

अल्लाह तआला काफ़िरों के बातिल दावे का रद्द फ़रमाता है कि रिज़्क़ की कमी या ज़्यादती अल्लाह की हिकमत और आज़माइश पर मबनी है, न कि किसी की नेकी या बदी की सनद। अल्लाह काफ़िर को भी दुनियावी दौलत अता फ़रमाता है और मोमिन को भी आज़माइश के लिए तंगी में रखता है। दुनिया में दाना और भूसा एक साथ रहते हैं, मगर आख़िरत में हक़ और बातिल को अलग कर दिया जाएगा। अफ़सोस कि अक्सर लोग इस हिकमत को नहीं समझते।

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