कुरान - 34:35 सूरह सबअ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

35
وَقَالُواْ نَحۡنُ أَكۡثَرُ أَمۡوَٰلٗا وَأَوۡلَٰدٗا وَمَا نَحۡنُ بِمُعَذَّبِينَ

Transliteration: (Wa qaaloo nahnu aksaru amwaalanw wa awlaadanw wa maa nahnu bimu 'azzabeen)

और उन्होंने कहा, "हम मालों और औलाद में तुमसे ज़्यादा हैं, और हम अज़ाब दिए जाने वाले नहीं हैं [109]!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह सबअ आयत 35 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह सबा तफ़सीर - आयत 35

"और उन्होंने कहा: 'हम मालों और औलाद में तुमसे ज़्यादा हैं, और हम अज़ाब दिए जाने वाले नहीं हैं [109]।'"

[109] दुनियावी ठाठ-बाट पर झूठा घमंड

काफ़िरों का यह ख़ाम-ख़्याल था कि दुनिया में कसरत-ए-माल और औलाद की फ़रावानी इस बात का सुबूत है कि अल्लाह उनसे राज़ी है। वे कहते थे कि जब दुनिया में हम पर नेमतें हैं तो आख़िरत में भी हमें अज़ाब नहीं हो सकता। यह उनकी सख़्त जहालत और ग़लतफ़हमी थी। दुनिया का माल महज़ आज़माइश है; अस्ल कामयाबी आख़िरत के ईमान और आमाले सालेहा पर मुनहसिर है।

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