Transliteration: (Wa maaa amwaalukum wa laaa awlaadukum billatee tuqarribukum 'indanaa zulfaaa illaa man aamana wa 'amila saalihan fa ulaaa'ika lahum jazaaa'ud di'fi bimaa 'amiloo wa hum fil ghurufaati aaminoon)
"और न तुम्हारे माल और न तुम्हारी औलाद [111] वे चीज़ें हैं जो तुम्हें हमारे नज़दीक मुक़र्रब बना दें, सिवाय उसके जो ईमान लाए और नेक अमल करे [112]। यही लोग हैं जिनके लिए उनके आमाल का दोहरा बदला है [113] और वे बुलंद बालाख़ानों में अम्न से रहेंगे [114]।"
बारगाह-ए-इलाही में क़ुर्बत का मेयार दौलत, क़बीला या खानदान नहीं है। बग़ैर ईमान के नबी का बेटा भी नजात नहीं पा सकता, और न ही दुनियावी तअल्लुक़ात आख़िरत में काम आ सकते हैं।
अल्लाह के नज़दीक इज़्ज़त का अस्ल ज़रिया ईमान और आमाले सालेहा हैं। हाँ, अगर माल को अल्लाह की राह में सदक़ा किया जाए और औलाद की दीनी तरबियत की जाए, तो वे भी तक़र्रूब का ज़रिया बन जाते हैं।
नेक मोमिनों को उनके आमाल का दोगुना और कई गुना बदला अता फ़रमाया जाएगा। उन्हें अपने नेक आमाल का सवाब भी मिलेगा और उन नेकियों का भी जो उनके ज़रिये दूसरों में फैलीं।
ऐसे अहले ईमान जन्नत के आलीशान और बुलंद महलात (ग़ुरफ़ात) में हमेशा के अम्नो अमान, इज़्ज़त और बे-ख़ौफ़ राहत में रहेंगे जहाँ कभी कोई ज़वाल न होगा।
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