Transliteration: (Qul inna Rabbee yabsutur rizqa limai yashaaa'u min 'ibaadihee wa yaqdiru lah; wa maaa anfaqtum min shai'in fahuwa yukhlifuhoo wa Huwa khairur raaziqeen)
"बेशक मेरा रब अपने बंदों में से जिसके लिए चाहता है रिज़्क़ कुशादा करता है [117] और जिसके लिए चाहता है तंग करता है। और जो चीज़ भी तुम ख़र्च करोगे वह उसका बदला अता फ़रमाएगा [118]; और वही सबसे बेहतर रिज़्क़ देने वाला है [119]।"
रोज़ी और मालो दौलत का पूरा निज़ाम अल्लाह तआला के क़ब्ज़े व क़ुदरत में है। वह अपनी हिकमत के मुताबिक़ जिसे चाहे बे-हिसाब दे और जिसके लिए चाहे तंग कर दे।
अल्लाह तआला वादा फ़रमाता है कि जो बंदा इख़्लास के साथ उसकी राह में सदक़ा व ख़ैरात करता है, अल्लाह दुनिया में भी उसकी नेमतों में बरकत फ़रमाता है और आख़िरत में भी कई गुना बेहतरीन सवाब अता फ़रमाता है।
अल्लाह तआला सबसे अफ़ज़ल और हक़ीक़ी रोज़ी देने वाला है जो तमाम कायनात को उसकी हाजत के मुताबिक़ बग़ैर किसी एहसान के रिज़्क़ अता फ़रमाता है।
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