कुरान - 34:41 सूरह सबअ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

41
قَالُواْ سُبۡحَٰنَكَ أَنتَ وَلِيُّنَا مِن دُونِهِمۖ بَلۡ كَانُواْ يَعۡبُدُونَ ٱلۡجِنَّۖ أَكۡثَرُهُم بِهِم مُّؤۡمِنُونَ

Transliteration: (Qaaloo Subhaanaka Anta waliyyunaa min doonihim bal kaanoo ya'budoonal jinna aksaruhum bihim mu'minoon)

वे अर्ज़ करेंगे, "तू पाक है! तू ही हमारा कारसाज़ (मालिक) है न कि ये; बल्कि ये तो जिन्नों (शैतानों) की इबादत करते थे [121]; उनमें से अक्सर [122] उन्हीं पर ईमान रखते थे [123]!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह सबअ आयत 41 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह सबा तफ़सीर - आयत 41

"वे अर्ज़ करेंगे: 'तू पाक है! तू ही हमारा कारसाज़ है न कि ये। बल्कि ये तो जिन्नों की इबादत करते थे [121]; उनमें से अक्सर [122] उन्हीं पर ईमान रखते थे [123]।'"

[121] पोशीदा तौर पर शैतानों की इबादत

फ़रिश्ते अपनी बे-ताल्लुक़ी का ऐलान करेंगे कि ये दर-हक़ीक़त शैतानों और जिन्नों के बहकावे में उनकी पैरवी करते थे। जो शख़्स किसी ग़ैर-शरई हुक्म में शैतान की बात मानता है, वह गोया उसी की बंदगी करता है।

[122] अक्सर मुशरिकीन की शैतान-परस्ती

यहाँ "अक्सर" से मुराद यह है कि या तो तमाम काफ़िर शैतानों के मुतीअ थे, या अक्सर इंसान इस गुमराह-कुन फंदे में फंस गए थे।

[123] जिन्नों पर झूठे अक़ीदे की हक़ीक़त

यहाँ "ईमान" से मुराद उनका शैतानों की बातों पर पुख़्ता यक़ीन और उनका ताबेदार होना है, जो सरतासर कुफ़्र और गुमराही था।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now