कुरान - 34:42 सूरह सबअ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

42
فَٱلۡيَوۡمَ لَا يَمۡلِكُ بَعۡضُكُمۡ لِبَعۡضٖ نَّفۡعٗا وَلَا ضَرّٗا وَنَقُولُ لِلَّذِينَ ظَلَمُواْ ذُوقُواْ عَذَابَ ٱلنَّارِ ٱلَّتِي كُنتُم بِهَا تُكَذِّبُونَ

Transliteration: (Fal Yawma laa yamliku ba'dukum liba'din naf'anw wa laa darraa; wa naqoolu lil lazeena zalamoo zooqoo 'azaaban Naaril latee kuntum bihaa tukazziboon)

पस आज के दिन [124] तुममें से कोई किसी दूसरे के नफ़ा या नुक़सान का इख़्तियार नहीं रखता [125]; और हम ज़ालिमों से कहेंगे [126], "आग के उस अज़ाब का मज़ा चखो जिसे तुम झुठलाया करते थे!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह सबअ आयत 42 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह सबा तफ़सीर - आयत 42

"पस आज के दिन [124] तुममें से कोई किसी दूसरे के नफ़ा या नुक़सान का इख़्तियार नहीं रखता [125]; और हम ज़ालिमों से कहेंगे [126]: 'आग के उस अज़ाब का मज़ा चखो जिसे तुम झुठलाया करते थे!'"

[124] मुशरिकीन और बातिल माबूदों की मुकम्मल लाचारी

क़यामत के दिन काफ़िरों और उनके बातिल माबूदों का हर सहारा टूट जाएगा। कोई मुशरिक या शैतान किसी दूसरे को नफ़ा या नुक़सान पहुँचाने की कोई ताक़त न रखेगा।

[125] मोमिनीन के लिए शफ़ाअत का इस्तिस्ना

यह लाचारी काफ़िरों और शैतानों के लिए है। साहेबाने ईमान और अंबिया व औलिया को अल्लाह अपने इज़्न से शफ़ाअत और दूसरों को नफ़ा पहुँचाने की ताक़त अता फ़रमाएगा।

[126] ज़ालिमों के लिए दायमी दोज़ख़ की सज़ा

मुशरिकीन और ज़ालिमों को दोज़ख़ की भड़कती आग में झोंक दिया जाएगा जिसका वे दुनिया में मज़ाक़ उड़ाया करते थे।

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