कुरान - 34:44 सूरह सबअ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

44
وَمَآ ءَاتَيۡنَٰهُم مِّن كُتُبٖ يَدۡرُسُونَهَاۖ وَمَآ أَرۡسَلۡنَآ إِلَيۡهِمۡ قَبۡلَكَ مِن نَّذِيرٖ

Transliteration: (Wa maaa aatainaahum min Kutubiny yadrusoonahaa wa maaa arsalnaaa ilaihim qablaka min nazeer)

हालाँकि हमने न उन्हें कोई किताबें दी थीं जिन्हें वे पढ़ते हों [131], और न आपसे पहले उनकी तरफ़ कोई डराने वाला (पैग़म्बर) भेजा था [132]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह सबअ आयत 44 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह सबा तफ़सीर - आयत 44

"हालाँकि हमने न उन्हें कोई किताबें दी थीं जिन्हें वे पढ़ते हों [131], और न आपसे पहले उनकी तरफ़ कोई डराने वाला भेजा था [132]।"

[131] अहले अरब के पास पिछली किताबों का न होना

हुज़ूर ﷺ की बेअसत से पहले मुशरिकीन-ए-अरब के पास कोई आसमानी किताब या सहीफ़ा न था जिसके ज़रिये वे शिर्क की कोई दलील पेश कर सकते।

[132] हुज़ूर ﷺ से पहले अरब में किसी नज़ीर की बेअसत न होना

हज़रत इस्माईल (अलैहिस्सलाम) के बाद अरब के ख़ित्ते में कोई रसूल नहीं आया था। हुज़ूर ﷺ की तशरीफ़-आवरी उनके लिए अज़ीम नेमत और हिदायत थी जिसकी उन्हें क़द्र करनी चाहिए थी।

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