Transliteration: (Wa maaa aatainaahum min Kutubiny yadrusoonahaa wa maaa arsalnaaa ilaihim qablaka min nazeer)
"हालाँकि हमने न उन्हें कोई किताबें दी थीं जिन्हें वे पढ़ते हों [131], और न आपसे पहले उनकी तरफ़ कोई डराने वाला भेजा था [132]।"
हुज़ूर ﷺ की बेअसत से पहले मुशरिकीन-ए-अरब के पास कोई आसमानी किताब या सहीफ़ा न था जिसके ज़रिये वे शिर्क की कोई दलील पेश कर सकते।
हज़रत इस्माईल (अलैहिस्सलाम) के बाद अरब के ख़ित्ते में कोई रसूल नहीं आया था। हुज़ूर ﷺ की तशरीफ़-आवरी उनके लिए अज़ीम नेमत और हिदायत थी जिसकी उन्हें क़द्र करनी चाहिए थी।
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