कुरान - 12:29 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

29
يُوسُفُ أَعۡرِضۡ عَنۡ هَٰذَاۚ وَٱسۡتَغۡفِرِي لِذَنۢبِكِۖ إِنَّكِ كُنتِ مِنَ ٱلۡخَاطِـِٔينَ

Transliteration: (Yoosufu a'rid 'an haaza wastaghfiree li zanbiki innaki kunti minal khaati'een (section 3))

"यूसुफ़! इस बात को जाने दो (चर्चा न करो); और (ऐ स्त्री!) तू अपने गुनाह की माफ़ी माँग; निस्संदेह, तू ही ग़लती करने वालों में से थी।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 29 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 29 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] मामले को दबाने का प्रयास

शाही प्रतिष्ठा और बदनामी के डर से अज़ीज़ ने यूसुफ़ से कहा कि इस मामले को यहीं ख़त्म समझो और किसी से ज़िक्र न करो, और अपनी पत्नी को डांटा कि अपने पाप से तौबा करे।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now