कुरान - 12:31 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

31
فَلَمَّا سَمِعَتۡ بِمَكۡرِهِنَّ أَرۡسَلَتۡ إِلَيۡهِنَّ وَأَعۡتَدَتۡ لَهُنَّ مُتَّكَـٔٗا وَءَاتَتۡ كُلَّ وَٰحِدَةٖ مِّنۡهُنَّ سِكِّينٗا وَقَالَتِ ٱخۡرُجۡ عَلَيۡهِنَّۖ فَلَمَّا رَأَيۡنَهُۥٓ أَكۡبَرۡنَهُۥ وَقَطَّعۡنَ أَيۡدِيَهُنَّ وَقُلۡنَ حَٰشَ لِلَّهِ مَا هَٰذَا بَشَرًا إِنۡ هَٰذَآ إِلَّا مَلَكٞ كَرِيمٞ

Transliteration: (Falammaa sami'at bimak rihinna arsalat ilaihinna wa a'tadat lahunna muttaka anw wa aatat kulla waahidatim min hunna sikkeenanw wa qaala tikh ruj 'alaihinna falammaa ra aynahooo akbarnahoo wa qatta'na aydiyahunna wa qulna haasha lillaahi maa haaza basharaa; in haazaaa illaa malakun kareem)

फिर जब उसने उनकी मक्कारी (ताने-बाज़ी) की बात सुनी, तो उसने उन्हें दावत भेजी और उनके लिए तकियेदार बैठक तैयार की और उनमें से प्रत्येक को (फल काटने के लिए) एक-एक छुरी दे दी, फिर (यूसुफ़ से) कहा, "इनके सामने बाहर निकलो!" फिर जब उन औरतों ने उन्हें देखा, तो वे उनकी सुंदरता से दंग रह गईं और (बेख़ुदी में) अपने हाथ काट बैठे और पुकार उठीं, "अल्लाह की पनाह! यह कोई इंसान नहीं है; यह तो कोई अत्यंत प्रतिष्ठित फ़रिश्ता है!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 31 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 31 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] "مَا هَٰذَا بَشَرًا إِنْ هَٰذَا إِلَّا مَلَكٌ كَرِيمٌ" – यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) का अलौकिक सौंदर्य

हदीस शरीफ़ (मेराज की रिवायत) में आता है कि अल्लाह तआला ने सारी कायनात का आधा हुस्न अकेले हज़रत यूसुफ़ को अता फ़रमाया था और बाक़ी आधा पूरी मानवता में बाँटा। जब यूसुफ़ सामने आए, तो औरतें उनके नूरानी जमाल को देखकर ऐसी मंत्रमुग्ध और सुध-बुध खो बैठीं कि फल काटते-काटते अपनी ही उंगलियां और हाथ काट लिए और दर्द का एहसास तक न हुआ। वे एक स्वर में बोल उठीं कि यह कोई नश्वर इंसान नहीं बल्कि कोई आसमानी फ़रिश्ता है।

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